Apple : Apple ऐप स्टोर पर नंबर 1 बना ‘मेड-इन-इंडिया’ ऐप ‘अरट्टई’, WhatsApp के सामने बड़ी चुनौती!
Apple : भारत में स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच एक ‘मेड-इन-इंडिया’ मैसेजिंग ऐप ने बड़ा कमाल कर दिखाया है। जोहो कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित ‘अरट्टई’ (Arattai) ऐप ने भारत के Apple ऐप स्टोर की सोशल नेटवर्किंग कैटेगरी में नंबर 1 का स्थान हासिल कर लिया है। महज कुछ ही दिनों में इसके यूजर्स में अभूतपूर्व उछाल आया है, जिसके बाद इसे सीधे तौर पर मैसेजिंग किंग WhatsApp के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
‘अरट्टई’ नाम का मतलब और इसकी शुरुआत
तमिल भाषा के शब्द ‘अरट्टई’ का मतलब ‘अनौपचारिक बातचीत’ या ‘कैज़ुअल चैट’ होता है। 2021 में लॉन्च हुए इस ऐप को हाल ही में केंद्रीय मंत्रियों के समर्थन और ‘स्वदेशी अपनाओ’ के आह्वान के बाद जबरदस्त लोकप्रियता मिली है।
क्या WhatsApp को रिप्लेस कर देगा ‘अरट्टई’?
‘अरट्टई’ की सफलता निश्चित रूप से WhatsApp के लिए एक मजबूत चुनौती पेश करती है, लेकिन इसे पूरी तरह से रिप्लेस करना अभी भी एक लंबी दौड़ है। इसके फीचर्स लगातार बेहतर हो रहे हैं और यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
Arattai बनाम WhatsApp : फीचर तुलना
| फीचर्स | Arattai (अरट्टई) | |
|---|---|---|
| टेक्स्ट, वॉयस मैसेज | ✅ उपलब्ध | ✅ उपलब्ध |
| ऑडियो/वीडियो कॉल | ✅ एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड | ✅ एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड |
| ग्रुप चैट, मीडिया शेयरिंग | ✅ उपलब्ध (1000 सदस्य तक) | ✅ उपलब्ध |
| चैट एन्क्रिप्शन | ❌ अभी उपलब्ध नहीं (जल्द आने की उम्मीद) | ✅ एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड |
| मल्टी-डिवाइस/TV सपोर्ट | ✅ डेस्कटॉप और Android TV सपोर्ट | ✅ मल्टी-डिवाइस सपोर्ट (फोन, डेस्कटॉप) |
| प्राइवेसी फोकस | यूजर डेटा का मुद्रीकरण नहीं करने का वादा | विज्ञापन के लिए डेटा उपयोग पर चिंताएं |
| यूजर्स की संख्या | तेजी से बढ़ रही है | 500 मिलियन से अधिक (भारत में) |
‘अरट्टई’ की खासियतें
- ‘मेड-इन-इंडिया’ पहचान और सरकारी समर्थन।
- कॉल के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन।
- Android TV पर सपोर्ट जैसा अनूठा फीचर।
- जोहो कॉर्पोरेशन की ओर से प्राइवेसी पर जोर, पर्सनल डेटा का मुद्रीकरण नहीं करने का दावा।
‘अरट्टई’ के सामने बड़ी चुनौतियाँ
- अरट्टई में चैट मैसेज के लिए अभी तक एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन उपलब्ध नहीं है, जबकि यह WhatsApp का एक मुख्य सुरक्षा फीचर है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक यह सुविधा नहीं आती, तब तक यह ऐप WhatsApp का मजबूत विकल्प बना रहेगा, पर उसे पूरी तरह से रिप्लेस नहीं कर पाएगा।
फिलहाल, अरट्टई को मिली यह सफलता भारतीय टेक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो यह दर्शाती है कि भारतीय उपभोक्ता स्वदेशी विकल्पों को अपनाने के लिए तैयार हैं।
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